मध्य प्रदेश कांग्रेस सेवा दल यंग ब्रिगेड ने इटारसी में स्मार्ट मीटर लगाए जाने के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। यंग ब्रिगेड के प्रदेश अध्यक्ष गजानंद तिवारी के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने स्थानीय एसडीएम कार्यालय पहुंचकर विरोध दर्ज कराया और ज्ञापन सौंपा। इस विरोध प्रदर्शन के जरिए कांग्रेस ने जनता के बीच बढ़ रही बिजली बिलों की चिंता और जबरन स्मार्ट मीटर लगाए जाने के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया।
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गजानंद तिवारी ने मीडिया से बातचीत में साफ कहा कि यह आंदोलन आम जनता की आवाज को बुलंद करने के लिए है। उन्होंने कहा, “जनता पहले ही महंगाई की मार झेल रही है और अब बिजली विभाग और उसके ठेकेदारों की मनमानी से लोगों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। बिना अनुमति के लोगों के घरों में स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं, जो पूरी तरह अनुचित और एकतरफा फैसला है।”
स्मार्ट मीटर से जनता डरी-सहमी
ज्ञापन में स्पष्ट तौर पर बताया गया कि इटारसी और नर्मदापुरम जिले में बीते कुछ समय से स्मार्ट मीटर को जबरन लोगों के घरों में लगाया जा रहा है। इस प्रक्रिया से आम जनता में भय और आक्रोश का माहौल बन गया है। लोगों का कहना है कि स्मार्ट मीटर की रीडिंग बहुत तेज चलती है, जिससे बिजली बिलों में बेतहाशा वृद्धि हो रही है। यह भी उल्लेख किया गया कि कई प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में भी यह खबर छप चुकी है कि स्मार्ट मीटर आम मीटर की तुलना में अधिक यूनिट दिखा रहे हैं।
कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि इस पूरी व्यवस्था का फायदा केवल ठेकेदारों को हो रहा है, जबकि आम उपभोक्ता को आर्थिक रूप से नुकसान उठाना पड़ रहा है। लोगों की जेब पर असर तो पड़ ही रहा है, साथ ही उनके मासिक बजट भी गड़बड़ हो रहे हैं।
बेरोजगारी का भी खतरा
स्मार्ट मीटर के पीछे बिजली विभाग की दलील यह है कि यह “मानव रहित प्रणाली” को बढ़ावा देगा। इस पर कांग्रेस नेताओं ने सवाल उठाए कि इसका मतलब साफ है कि हजारों की संख्या में जो कर्मचारी आउटसोर्स पर काम कर रहे हैं, उनकी नौकरी खतरे में पड़ सकती है। जब उपभोक्ता खुद नहीं चाहता कि उसके घर में स्मार्ट मीटर लगे, तो जबरन यह कदम क्यों उठाया जा रहा है?
गजानंद तिवारी ने कहा, “सरकार को बताना चाहिए कि किस मजबूरी के तहत विभाग के अधिकारी और ठेकेदार इतने जबरदस्त दबाव में स्मार्ट मीटर लगवा रहे हैं। कई जगह तो बंदूक की नोक पर मीटर बदले जाने की घटनाएं भी सामने आई हैं, जो लोकतंत्र के लिए बेहद शर्मनाक हैं।”
ज्ञापन में उठाई ये प्रमुख मांगें
कांग्रेस सेवा दल की ओर से एसडीएम को दिए गए ज्ञापन में मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदु शामिल थे:
- उपभोक्ताओं की अनुमति के बिना जबरन स्मार्ट मीटर लगाना तुरंत रोका जाए।
- जिन इलाकों में पहले से मीटर लगे हैं, वहां जनता की राय लेकर ही बदलाव किया जाए।
- स्मार्ट मीटरों की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से करवाई जाए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि वे आम मीटरों से अधिक यूनिट क्यों दिखा रहे हैं।
- बेरोजगारी के खतरे को देखते हुए आउटसोर्स कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
- आम जनता के हितों को ध्यान में रखते हुए भविष्य की नीतियों में पारदर्शिता लाई जाए।
कांग्रेस ने दी आंदोलन और कोर्ट जाने की चेतावनी
गजानंद तिवारी ने कहा कि अगर सरकार ने इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया, तो कांग्रेस सड़क से लेकर विधानसभा और जरूरत पड़ी तो न्यायालय का दरवाजा खटखटाने में भी पीछे नहीं हटेगी। उन्होंने साफ कहा, “अगर जनता परेशान हुई तो सरकार और प्रशासन इसकी पूरी जिम्मेदारी ले।”
उन्होंने यह भी बताया कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार के मार्गदर्शन में पूरे प्रदेश का कांग्रेस कार्यकर्ता आम जनता की आवाज को मजबूत करने के लिए तैयार है।
विरोध प्रदर्शन में ये रहे प्रमुख नेता और कार्यकर्ता शामिल
इस ज्ञापन सौंपने के कार्यक्रम में बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता और पदाधिकारी मौजूद रहे। इनमें प्रमुख नाम रहे:
- इटारसी नगर कांग्रेस अध्यक्ष मयूर जायसवाल
- सेवा दल जिला अध्यक्ष अमित गुप्ता
- वरिष्ठ नेता रमेश बामने, अजय शुक्ला, विजय बाबू चौधरी
- पार्षद: नारायण ठाकुर, सीमा भदौरिया, अंजलि कलोसिया, कन्हैया लाल महानी, दिलीप गोस्वामी, अमित कापरे
- पूर्व पार्षद: राजेंद्र जोशी
- पार्षद प्रतिनिधि: राहुल वर्मा, अभिषेक साहू, मनीष चौधरी
- सेवादल नगर अध्यक्ष करण भदौरिया, जिला महामंत्री संजय धर
- अन्य कार्यकर्ता: चंद्रकांत बहारें, नारायण गौर, ज्ञानेंद्र उपाध्याय, गोल्डी चौधरी, सोनू बकोरिया, सौम्य दुबे, राहुल दुबे, दिनेश बलौरिया, यूनिस पठान, आकाश अग्रवाल, पप्पी कालोसिया, बंटी राठौर आदि।
जनता की आवाज बन रही कांग्रेस
इस पूरे घटनाक्रम से साफ हो गया है कि कांग्रेस जनता के मुद्दों को लेकर अब मैदान में उतर चुकी है। स्मार्ट मीटर से हो रही परेशानियों को लेकर कांग्रेस का यह कदम विपक्ष की सक्रियता का संकेत है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस ज्ञापन पर क्या निर्णय लेता है और जनता को राहत देने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।