डिकेश शर्मा, दुर्गुकोंदल (कांकेर)।
हरियाली तिहार के मौके पर दुर्गुकोंदल ब्लॉक के ग्राम आमागढ़ में पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए “एक पेड़ मां के नाम 2.0” अभियान के तहत सामूहिक पौधरोपण किया गया। इस पहल में स्थानीय स्व-सहायता समूह की महिलाएं, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, शिक्षक और ग्रामीणों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और गांव को हरियाली से सजाने का संकल्प लिया।
आमागढ़ गांव में आंगनबाड़ी केंद्र और अस्पताल परिसर में आम, मुनगा और बरगद जैसे पौधे लगाए गए। वहीं, शिक्षक भूपेंद्र नरेटी ने शीतला माता मंदिर परिसर में कदम के पेड़ रोपे। इस पहल का उद्देश्य न केवल पर्यावरण संरक्षण है, बल्कि समाज को यह संदेश देना भी है कि मां के सम्मान में लगाए गए पौधे जीवनभर फल, छांव और ऑक्सीजन देते हैं।
इस अभियान में सक्रिय रूप से भाग लेने वाली महिलाओं में सोनाय नरेटी, मालती बाई, जनक बाई नेताम और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता गैदबाई टांडिया शामिल रहीं। इन्होंने लोगों से अपील की कि हर व्यक्ति को अपने जन्मदिन, विशेष पर्व या खास अवसरों पर एक पौधा जरूर लगाना चाहिए और उसे बड़े होने तक संवारना चाहिए। यह धरती माता और हमारे जीवनदायिनी प्रकृति के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
पौधरोपण कार्यक्रम में शामिल अन्य प्रमुख महिलाएं थीं – रामों बाई उयके, मीना उयके, सुमित्रा पद्माकर, जयबत्ती नरेटी, कुंवर बाई मेरिया, मगतीन सिन्हा और सहायिका लोकेश्वरी विश्वकर्मा। इनके साथ आंगनबाड़ी कार्यकर्ता गैदबाई टांडिया, ग्रामीण दिनेश मेरिया, संजय नरेटी और शिक्षक भूपेंद्र नरेटी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भी पौधे लगाए।
“एक पेड़ मां के नाम” अभियान का उद्देश्य पर्यावरण के प्रति लोगों में संवेदनशीलता पैदा करना है। यह अभियान न केवल वृक्षारोपण को बढ़ावा दे रहा है बल्कि लोगों के भावनात्मक जुड़ाव को भी प्रकृति से जोड़ रहा है। यह संदेश भी दिया जा रहा है कि एक पौधा लगाने से न केवल हम आने वाली पीढ़ियों को साफ हवा दे सकते हैं, बल्कि धरती माता का ऋण भी कुछ हद तक चुका सकते हैं।
गांव के लोगों में इस अभियान को लेकर उत्साह साफ दिखा। सभी ने मिलकर पौधों की देखरेख करने का संकल्प लिया ताकि आने वाले समय में ये पेड़ बड़े होकर गांव की सुंदरता और पर्यावरण को संवार सकें।
निष्कर्ष , हरियाली तिहार जैसे पर्वों पर वृक्षारोपण कर हम समाज और पर्यावरण दोनों के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभा सकते हैं। “एक पेड़ मां के नाम” एक भावनात्मक और प्रेरणादायक पहल है, जिसे हर गांव और शहर में अपनाया जाना चाहिए।