गुरुर (बालोद)
ग्राम पंचायत सोरर में वर्षों पहले किए गए काम और सप्लाई का भुगतान अब तक न मिलने से गांव के कई फर्म संचालक परेशान हैं। हालात ये हैं कि संचालक बार-बार जनपद और पंचायत कार्यालयों का चक्कर लगा चुके हैं, लेकिन जब वहां से राहत नहीं मिली तो उन्होंने बालोद कलेक्टर से मिलकर मदद की गुहार लगाई है।
पूरा मामला जनपद पंचायत गुरुर अंतर्गत ग्राम पंचायत सोरर का है, जहां वर्ष 2022-23 और 2023-24 के दौरान पंचायत के माध्यम से गांव में कई कार्य कराए गए थे और जरूरी सामान खरीदे गए थे। लेकिन अब तक इन कार्यों और सप्लाई का भुगतान नहीं हुआ है। इस कारण फर्म संचालकों को आर्थिक तंगी के साथ मानसिक परेशानियों का भी सामना करना पड़ रहा है।
किन-किन लोगों को नहीं मिला भुगतान?
जानकारी के अनुसार, जिन फर्म संचालकों को भुगतान नहीं मिला है उनमें गोपी किशन कुंभज, कोमेन्द्र साहू, दिलेश्वर पटेल, देवेंद्र पटेल, किशोर कुमार और युवराज कोसरे शामिल हैं। इन सभी ने पंचायत से जुड़े विभिन्न कार्य किए या सामान की सप्लाई की, लेकिन भुगतान अब तक अटका हुआ है।
गोपी किशन कुंभज की किराना दुकान से पंचायत द्वारा जरूरी सामान खरीदे गए थे।
कोमेन्द्र साहू ने समियाना (पंडाल) की व्यवस्था की थी।
दिलेश्वर पटेल ने हैमर मशीन से नाली की खुदाई और मोटर पंप से संबंधित कार्य किए।
देवेंद्र पटेल ने वेल्डिंग कार्य किया।
किशोर कुमार ने सफाई व्यवस्था के तहत वाहन उपलब्ध कराया।
युवराज कोसरे ने इलेक्ट्रॉनिक संबंधी कार्य किए थे।
इसके अलावा, ब्लॉक मुख्यालय गुरुर में स्थित कबीर इलेक्ट्रॉनिक और जनता इलेक्ट्रॉनिक से भी ग्राम पंचायत ने सामान की खरीद की थी, लेकिन इनका भी बकाया भुगतान लंबित है।
पूर्व सरपंच के समय हुआ था काम, नए सरपंच कर रहे इनकार
पीड़ित फर्म संचालकों का कहना है कि ये सभी काम और सामान की खरीदी पूर्व सरपंच और सचिव के कार्यकाल में की गई थी। अब जब नए सरपंच और सचिव ने कार्यभार संभाला है तो वे इन भुगतानों को स्वीकार करने और राशि जारी करने से इनकार कर रहे हैं।
इससे न सिर्फ गांव के छोटे व्यापारियों की मेहनत की कमाई फंसी हुई है, बल्कि उन्हें बैंक कर्ज और अन्य आर्थिक जिम्मेदारियों से जूझना पड़ रहा है।
कलेक्टर से की गुहार
बार-बार पंचायत और जनपद कार्यालयों में चक्कर लगाने के बावजूद जब कोई समाधान नहीं निकला, तो परेशान फर्म संचालकों ने बालोद कलेक्टर से मिलकर अपनी बात रखी और जल्द भुगतान की मांग की है। सभी पीड़ितों ने उम्मीद जताई है कि जिला प्रशासन इस मामले में उचित कार्रवाई करेगा और उन्हें न्याय मिलेगा।
प्रशासन से न्याय की उम्मीद
गांव के व्यापारी और ठेकेदार इस बात को लेकर चिंतित हैं कि अगर पंचायत के ऐसे रवैये पर रोक नहीं लगी, तो आगे कोई भी ग्रामीण स्तर पर सरकारी कार्य करने से कतराएगा। इससे विकास कार्यों पर असर पड़ सकता है। अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है।