कांकेर (छत्तीसगढ़), 23 जुलाई 2025। छत्तीसगढ़ सरकार के निर्देश पर चल रहे राज्यव्यापी “एक पेड़ मां के नाम 2.0 महाअभियान” के तहत जिलेभर में वृक्षारोपण का काम तेजी से चल रहा है। इसी कड़ी में बुधवार को कांकेर जिले के जनपद पंचायत नरहरपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत दुधावा में बड़े स्तर पर पौधरोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
यह कार्यक्रम न सिर्फ एक सरकारी पहल था, बल्कि इसमें गांव के लोगों, स्कूलों, छात्रावासों, आंगनबाड़ियों और महिलाओं की भी सक्रिय भागीदारी रही। खासकर प्रधानमंत्री आवास के हितग्राही, महिला हितग्राही (महतारी वंदना योजना) और सुपोषण वाटिका से जुड़ी महिलाओं ने भी अपने हाथों से पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण में योगदान दिया।
विद्यालय और अमृत सरोवर बना पौधरोपण का केंद्र
दुधावा गांव के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय और अमृत सरोवर परिसर में खासतौर पर पौधरोपण किया गया। इस मौके पर गांव के बच्चों ने भी पर्यावरण के महत्व को समझते हुए अपने-अपने नाम के पौधे लगाए और उन्हें संरक्षित रखने की जिम्मेदारी ली।
जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी ने बढ़ाया उत्साह
इस महाअभियान में जिला पंचायत उपाध्यक्ष तारा ठाकुर, जनपद पंचायत नरहरपुर अध्यक्ष सोमन सिंह कावड़े, उपाध्यक्ष संजू गोपाल साहू, जनपद सदस्य वीना राय, मंडल अध्यक्ष टिकेश सिन्हा, ग्राम पंचायत के सरपंच, उपसरपंच, वार्ड पंच, शिक्षकगण, और गांव के बुजुर्ग एवं युवा बड़ी संख्या में शामिल हुए।
सभी ने मिलकर पर्यावरण बचाने का संदेश दिया और अपने-अपने स्तर पर पेड़ लगाने और उन्हें संरक्षित रखने का संकल्प लिया।
स्कूल के बच्चों और शिक्षकों की सराहनीय भूमिका
विद्यालय के शिक्षकों और छात्रों ने इस आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। छात्रों ने न सिर्फ पौधे लगाए बल्कि वृक्षों के महत्व पर स्लोगन और पोस्टर के जरिए जागरूकता भी फैलाई। शिक्षकों ने बताया कि बच्चों में पर्यावरण के प्रति समझ और जिम्मेदारी विकसित करना आज की सबसे बड़ी जरूरत है।
सरकार की मंशा – हर घर, हर आंगन में हरियाली
“एक पेड़ मां के नाम” अभियान का उद्देश्य सिर्फ पेड़ लगाना नहीं, बल्कि हर नागरिक को भावनात्मक रूप से एक पौधे से जोड़ना है। यह अभियान पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ मातृत्व के सम्मान को भी दर्शाता है। इसी सोच को ध्यान में रखते हुए यह पहल ग्राम पंचायत स्तर तक पहुंचाई जा रही है।
महिलाओं की विशेष भागीदारी
कार्यक्रम में महतारी वंदना योजना और सुपोषण अभियान से जुड़ी महिलाओं ने भी बढ़-चढ़कर भाग लिया। उन्होंने अपने आंगन, आंगनबाड़ी केंद्रों और तालाबों के पास पौधे लगाए। इस पहल ने महिलाओं को आत्मनिर्भरता और पर्यावरणीय जिम्मेदारी से जोड़ने का कार्य किया।
स्थानीय लोगों की सराहना
गांव के ग्रामीणों ने भी इस अभियान को खूब सराहा। उन्होंने बताया कि इससे गांव की हरियाली बढ़ेगी और आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ वातावरण मिलेगा। सरपंच ने भी सभी से अपील की कि लगाए गए पौधों की देखरेख नियमित रूप से की जाए।
निष्कर्ष:
कांकेर जिले के दुधावा गांव में आयोजित यह वृक्षारोपण कार्यक्रम न सिर्फ पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम था, बल्कि सामुदायिक भागीदारी और जागरूकता का सशक्त उदाहरण भी बना। “एक पेड़ मां के नाम” जैसी पहलें निश्चित रूप से हरियाली और संवेदनशीलता दोनों को बढ़ावा देती हैं। अगर हर गांव इसी तरह आगे आए, तो आने वाला कल और भी हरा-भरा होगा।