जितेन्द्र साहू धमतरी
धमतरी कलेक्ट्रेट में सोमवार को उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब एक युवक अपने ऊपर पेट्रोल डालकर आत्मदाह करने पहुंच गया। युवक को जलाने ही वाला था, लेकिन मौके पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने सतर्कता दिखाते हुए उसे समय रहते रोक लिया। इसके बाद युवक को हिरासत में लेकर रुद्री थाना ले जाया गया।
यह चौंकाने वाली घटना जिले के ग्राम डोमा निवासी करण सोनवानी से जुड़ी है, जो बीते कई वर्षों से प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के तहत मकान की मांग कर रहा था। लेकिन बार-बार कोशिशों के बाद भी उसे सरकारी योजना का लाभ नहीं मिला, जिससे परेशान होकर उसने यह कदम उठाने की कोशिश की।
युवक बोला- दो साल से लगा रहा गुहार, नहीं मिला आवास
करण सोनवानी ने बताया कि उसका परिवार बेहद गरीब है और कच्चे मकान में रहकर रोज़ाना मजदूरी करके किसी तरह जीवन चला रहे हैं। उसने बताया कि वह पिछले दो साल से प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान पाने के लिए लगातार आवेदन दे रहा है और जनदर्शन में भी कई बार अपनी बात रख चुका है, लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई।
करण का आरोप है कि उनके पिता के नाम से प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत हुआ था, लेकिन पंचायत ने उनका नाम सूची से काट दिया। यह बात उन्हें बेहद चुभ गई और उन्हें लगा कि गरीब की कोई सुनता ही नहीं है। इसी निराशा और हताशा में वे सोमवार को कलेक्ट्रेट जनदर्शन में पेट्रोल लेकर पहुंच गए।
जनदर्शन के दौरान युवक ने की आत्मदाह की कोशिश, पुलिस ने समय रहते बचाई जान
करण जैसे ही जनदर्शन में पहुंचा, उसने अचानक अपने ऊपर पेट्रोल उड़ेल लिया और आग लगाने की कोशिश करने लगा। यह देख वहां तैनात पुलिस जवानों में अफरा-तफरी मच गई। जवानों ने तुरंत स्थिति को संभालते हुए करण को आग लगाने से रोक लिया और सुरक्षित हिरासत में ले लिया।
इसके बाद पुलिस युवक को रुद्री थाने ले गई, जहां उससे पूछताछ की गई। इस घटना ने कलेक्ट्रेट परिसर में मौजूद सभी लोगों को चौंका दिया और माहौल तनावपूर्ण हो गया।
प्रशासन ने दी सफाई, कहा- नियमों के तहत होता है आवास स्वीकृत
इस पूरे मामले पर जिला प्रशासन की ओर से बयान सामने आया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ ग्राम सभा में अनुमोदन के बाद ही किसी को दिया जाता है। यानी अंतिम निर्णय ग्राम स्तर की बैठक में लिया जाता है।
हालांकि प्रशासन का कहना है कि यह जांच की जाएगी कि अगर पहले युवक के पिता के नाम से आवास स्वीकृत हुआ था, तो बाद में उनका नाम सूची से क्यों हटाया गया। फिलहाल युवक की जान तो बच गई है, लेकिन यह घटना सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता और अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुंचाने की व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करती है।
गरीबों की अनदेखी बना सकती है हालात विस्फोटक
करण सोनवानी जैसे हजारों लोग हैं, जो सरकारी योजनाओं की आस में सालों तक भटकते रहते हैं। जब जरूरतमंदों तक योजनाओं का लाभ नहीं पहुंचता, तो हताशा उन्हें खतरनाक कदम उठाने को मजबूर कर देती है। यह मामला एक चेतावनी है कि योजनाओं की जमीनी मॉनिटरिंग और समीक्षा समय-समय पर होनी चाहिए, ताकि जरूरतमंदों को उनका हक समय पर मिल सके।