कांकेर में छात्राओं के लिए आयोजित हुआ साइबर सुरक्षा और जागरूकता कार्यक्रम, ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ अभियान के तहत मिला मार्गदर्शन कांकेर।आज के डिजिटल दौर में साइबर क्राइम एक गंभीर समस्या बन चुका है, खासकर बच्चों और किशोरियों के लिए। इसी को ध्यान में रखते हुए महिला एवं बाल विकास विभाग कांकेर की ओर से ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना’ के अंतर्गत एक साइबर सुरक्षा और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह आयोजन आदिवासी कन्या आश्रम, सिंगारभाट, कांकेर में किया गया, जिसमें कक्षा 9वीं और 10वीं की सभी छात्राएं शामिल हुईं।
कार्यक्रम का उद्देश्य था – छात्राओं को साइबर अपराध, सोशल मीडिया के खतरे और आत्मरक्षा के तरीकों के बारे में जागरूक करना।
ऑनलाइन ठगी से लेकर एआई से जुड़ी चालाकियों तक सब पर चर्चा
इस कार्यशाला में पुलिस विभाग के मास्टर ट्रेनर ने छात्राओं को बहुत ही सरल और प्रभावी तरीके से बताया कि आजकल किस तरह के ऑनलाइन फ्रॉड आम हो गए हैं।
उन्होंने बताया कि:
महंगे गिफ्ट या लॉटरी का झांसा देकर लोगों को ठगा जाता है।
डिजिटल अरेस्ट जैसी फर्जी धमकियों से डराया जाता है।
अनजान लोन ऐप्स के जरिए लोगों का डेटा चुराया जाता है।
सोशल मीडिया पर एआई (Artificial Intelligence) की मदद से फर्जी प्रोफाइल और अश्लील कंटेंट बनाए जा रहे हैं।
छात्राओं को समझाया गया कि कभी भी किसी अनजान लिंक, फोन कॉल या ऐप पर भरोसा न करें। हर संदिग्ध चीज़ से सतर्क रहें और किसी भी जानकारी को शेयर करने से पहले जांच जरूर करें।
गुड टच-बेड टच की भी दी गई जानकारी
कार्यक्रम में महिला पुलिस सुरक्षा टीम ने भी अहम भूमिका निभाई। उन्होंने छात्राओं को गुड टच और बैड टच की पहचान करना सिखाया।
इसके अलावा यह भी बताया गया कि अगर कोई छेड़छाड़ या असहज स्थिति पैदा करे तो तुरंत किसे और कैसे जानकारी देनी चाहिए।
उन्होंने कहा, “चुप रहना समाधान नहीं है, बोलना और सही कदम उठाना ज़रूरी है।”
महिला सुरक्षा से जुड़ी सरकारी योजनाओं की भी जानकारी दी गई
कार्यक्रम के दौरान मिशन शक्ति के तहत संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी भी दी गई, जैसे:
बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना
घरेलू हिंसा से सुरक्षा कानून
सखी वन स्टॉप सेंटर
महिला हेल्पलाइन 181
चाइल्ड हेल्पलाइन 1098
कन्या भ्रूण हत्या रोकथाम अभियान
इन योजनाओं के बारे में छात्राओं को विस्तार से बताया गया ताकि वे जरूरत पड़ने पर इनका लाभ उठा सकें।
जागरूकता से ही बचाव संभव
इस कार्यक्रम में साइबर सुरक्षा टीम, महिला पुलिस टीम, महिला एवं बाल विकास विभाग और आदिवासी कन्या आश्रम के स्टाफ भी मौजूद थे। सभी ने मिलकर छात्राओं के सवालों के जवाब दिए और उन्हें आत्मनिर्भर एवं सतर्क रहने के लिए प्रेरित किया।
छात्राओं ने भी इस अवसर का भरपूर लाभ उठाया और अपनी जिज्ञासाएं खुलकर रखीं। कार्यक्रम ने यह साबित किया कि सही जानकारी और समय पर जागरूकता ही किसी भी खतरे से सबसे बड़ी ढाल होती है।