कांकेर।
रक्षाबंधन का त्योहार इस बार कांकेर जिले की महिला अधिकारियों के लिए कुछ खास बन गया। उन्होंने इस पवित्र पर्व को सिर्फ रिश्तों तक सीमित न रखते हुए एक खास पहल की – देश की सीमाओं पर तैनात बहादुर जवानों के लिए अपने हाथों से राखियां भेजीं। यह कदम न सिर्फ देशप्रेम का प्रतीक बना, बल्कि समाज में भी एक सकारात्मक संदेश छोड़ गया।
इस सराहनीय पहल में डिप्टी कलेक्टर सुश्री रानू मैथ्यू, उप संचालक समाज कल्याण श्रीमती क्षमा शर्मा और जिला कोषालय अधिकारी श्रीमती रेणु सोनबेर ने सहभागिता निभाई। इन महिला अफसरों ने अपने हाथों से रक्षासूत्र तैयार कर भारतीय सेना के जवानों तक भेजे और यह संदेश दिया कि देश की हर बहन अपने भाई जैसे जवानों की सलामती और सुरक्षा की कामना करती है।
भावनाओं से जुड़ा यह कदम बना चर्चा का विषय
रक्षासूत्र भेजते हुए अधिकारियों ने कहा कि – “हमारे देश के सैनिक दिन-रात सीमाओं पर डटे रहते हैं। वे अपने परिवार से दूर रहकर हमारी सुरक्षा करते हैं। ऐसे में हमारी यह छोटी-सी पहल उनके प्रति सम्मान और स्नेह जताने का माध्यम है। यह रक्षासूत्र केवल धागा नहीं, बल्कि हमारी भावनाओं, एकता और कृतज्ञता का प्रतीक है।”
इस पहल ने समाज में भावनात्मक जुड़ाव को और मजबूत किया है। जब अफसरों जैसी जिम्मेदार पदों पर कार्यरत महिलाएं खुद आगे आकर देशभक्ति की मिसाल पेश करती हैं, तो आम नागरिक भी इससे प्रेरित होते हैं।
सैनिकों को मिला अपनों जैसा अपनापन
देश की रक्षा में लगे जवानों के लिए यह रक्षासूत्र सिर्फ एक पारंपरिक धागा नहीं, बल्कि घर की बहनों की याद, अपनापन और भावनात्मक ऊर्जा से भरा एक संदेश है। इन राखियों के साथ अधिकारियों ने पत्र भी भेजे, जिनमें सैनिकों को सलाम करते हुए लिखा गया कि – “हम आप पर गर्व करते हैं, आप ही हमारे सच्चे रक्षक हैं। रक्षाबंधन के इस पर्व पर हमारी शुभकामनाएं और दुआएं आपके साथ हैं।”
समाज में जागरूकता का संदेश
इस मुहिम ने जिले में एक सकारात्मक माहौल तैयार किया है। स्कूलों और सामाजिक संस्थाओं में भी अब इस तरह की सोच पनप रही है कि पर्व-त्योहारों को सिर्फ अपने परिवार तक सीमित न रखा जाए, बल्कि समाज और देशहित में कुछ सार्थक कार्य किए जाएं।
कई युवाओं ने सोशल मीडिया पर इस पहल को सराहा और कहा कि – “यह एक प्रेरणादायी कार्य है। हम भी अपने-अपने स्तर पर सेना के जवानों के लिए राखी भेजने की तैयारी कर रहे हैं।”
कांकेर से एक भावनात्मक संदेश पूरे देश तक
कांकेर की महिला अधिकारियों की यह पहल पूरे देश के लिए एक मिसाल बन गई है। यह दिखाता है कि हम सब कहीं न कहीं सैनिकों से जुड़े हुए हैं। वे चाहे हमसे कितने भी दूर क्यों न हों, हमारी भावनाएं, स्नेह और समर्थन हमेशा उनके साथ हैं।
इस तरह की पहलों से समाज में देशप्रेम की भावना और मजबूत होती है। साथ ही, यह हमें याद दिलाती है कि त्योहारों का असली मतलब सिर्फ उत्सव नहीं, बल्कि रिश्तों और जिम्मेदारियों का सम्मान करना भी है।