विजय अग्रवाल मैहर, मध्य प्रदेश
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मैहर, जहाँ माँ शारदा विराजमान हैं, हर रोज़ हज़ारों भक्तों से गुलज़ार रहता है. ये वो पवित्र भूमि है जहाँ लोग सुकून और आशीर्वाद पाने आते हैं. लेकिन, क्या आपको पता है कि इसी पवित्र धाम के भीतर एक ऐसी जगह है जो अब बीमारियों का अड्डा बनती जा रही है? हम बात कर रहे हैं मंदिर परिसर के अंदर बने उस आपातकालीन अस्पताल की, जिसे श्रद्धालुओं की मदद के लिए बनाया गया था, पर आज वो कूड़े के ढेर और सड़ांध से भरा पड़ा है. ये पढ़कर किसी का भी दिल कचोट उठेगा!
माँ शारदा प्रबंध समिति ने इस अस्पताल भवन, टीनशेड और दूसरी ज़रूरी सुविधाओं पर लाखों रुपये खर्च किए, लेकिन मैहर नगर पालिका और मंदिर समिति, दोनों की लापरवाही ने इस जगह को कचरे के ढेर में बदल दिया है. यहाँ चारों तरफ़ गंदगी का आलम है और बदबू से सांस लेना भी मुश्किल हो जाता है.
पवित्र जगह पर गंदगी: ये कैसा “प्रशासनिक निकम्मापन”?
ज़रा सोचिए, जो श्रद्धालु दूर-दूर से माँ के दर्शन को आते हैं, ख़ासकर बुज़ुर्ग, महिलाएँ या जो लोग बीमार हैं, अगर उन्हें किसी आपात स्थिति में इस अस्पताल की ज़रूरत पड़े, तो उन्हें इलाज से पहले गंदगी और संक्रमण का सामना करना पड़ेगा. ये तो सीधे-सीधे इंसान के जीने के अधिकार और स्वस्थ रहने के न्यूनतम अधिकार का मज़ाक उड़ाना है. एक पवित्र तीर्थस्थल पर ऐसी लापरवाही देखकर सवाल उठता है कि आख़िर प्रशासन क्या कर रहा है?
कौन ज़िम्मेदार- नगर पालिका या मंदिर समिति?
मैहर नगर पालिका के मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) की ये क़ानूनी और नैतिक ज़िम्मेदारी बनती है कि वो सार्वजनिक और धार्मिक स्थलों पर साफ़-सफ़ाई का पूरा ध्यान रखें. लेकिन ज़मीनी हक़ीक़त ये है कि साफ़-सफ़ाई बस कागज़ों तक ही सीमित रह गई है.
“वहीं, मंदिर समिति भी अपनी जवाबदेही से बच रही है. सारा ठीकरा नगर परिषद के माथे मढ़कर वे चुपचाप बैठे हैं, जबकि उनके पास तो अपने सफाई कर्मचारी भी हैं. ये तो बिलकुल ऐसा हो गया, जैसे घर में आग लगी हो और दो लोग एक-दूसरे पर दोष मढ़ रहे हों, बजाय आग बुझाने के!”
धार्मिक स्थल की मर्यादा का अपमान
भारत सरकार और राज्य सरकारों ने तीर्थस्थलों की साफ़-सफ़ाई, संक्रमण रोकने के नियम और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए साफ़ निर्देश जारी किए हैं. इन निर्देशों में साफ़-साफ़ कहा गया है कि धार्मिक परिसर, अस्पताल और सार्वजनिक स्थल हर हाल में साफ़-सुथरे, रोग-मुक्त और अच्छी तरह से रखे जाएँगे.
मैहर में जो हो रहा है, वो सिर्फ़ सरकारी नियमों की अनदेखी नहीं है, बल्कि ये हमारी श्रद्धा, विश्वास और धर्म की मर्यादा का भी अपमान है. माँ शारदा के चरणों में गंदगी देखना किसी भी भक्त के लिए दुखद है.
कलेक्टर साहब, अब आप ही कुछ करिए!
इस पूरे मामले में ये बिल्कुल साफ़ है कि:
- नगर परिषद के मुख्य नगर अधिकारी अपनी ज़िम्मेदारी से भटक गए हैं. इसकी एक बड़ी वजह ये भी बताई जा रही है कि मैहर के CMO पर तीन-तीन नगर पालिकाओं का बोझ है. मैहर एक बड़ा और महत्वपूर्ण शहर है, फिर भी यहाँ पर नियमित CMO की नियुक्ति नहीं हो पा रही है. क्या ये राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी है? या भारतीय जनता पार्टी की कोई ख़ास नीति है कि मैहर जैसे पवित्र और संवेदनशील जगह पर नियमित CMO नहीं भेजा जा रहा? ये सवाल उठना लाज़मी है.
- मंदिर समिति भी अपने कर्तव्यों से भाग रही है, और इसका सीधा नतीजा जनता के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है.
ज़रूरत इस बात की है कि तुरंत इस पर कार्रवाई हो. मंदिर समिति की सफ़ाई व्यवस्था की समीक्षा की जाए और मंदिर अस्पताल परिसर में एक ख़ास सफ़ाई अभियान चलाया जाए. ये तीर्थ भूमि है, कूड़े का ढेर नहीं.
माँ शारदा की छाया में पवित्रता, सेवा और स्वास्थ्य का वास होना चाहिए, न कि गंदगी, बीमारी और लापरवाही का. उम्मीद है कि अधिकारी इस गंभीर मुद्दे पर जल्द ही ध्यान देंगे और माँ शारदा धाम को उसकी खोई हुई पवित्रता लौटाएँगे.