पिछले कुछ दिनों से देवरी और आसपास के इलाकों के किसानों की रातों की नींद हराम हो गई है. वजह है अपनी मेहनत से उगाई गई मूंग की फसल की तुलाई. शनिवार को भारतीय किसान यूनियन (BKU) के झंडे तले सैकड़ों किसान देवरी तहसील कार्यालय पहुँचे और कलेक्टर के नाम तहसीलदार को एक ज्ञापन सौंपा. उनकी आँखों में गुस्सा था, लेकिन आवाज़ में बेबसी. “हमारी मूंग कौन खरीदेगा, जब वेयरहाउस फुल हैं और स्लॉट बुक नहीं हो रहे?” – यही सवाल हर किसान की ज़ुबान पर था.
क्यों परेशान हैं किसान?
किसानों का कहना है कि देवरी क्षेत्र में तीन सरकारी वेयरहाउस हैं जहाँ मूंग की तुलाई चल रही है – लेकिन ये तीनों अब पूरी तरह भर चुके हैं. इसका सीधा मतलब है कि अब नए किसानों के लिए तुलाई के लिए स्लॉट ही बुक नहीं हो रहे. आप ही सोचिए, एक किसान ने अपनी फसल उगा ली, काट ली, और अब उसे बेचने के लिए कोई जगह नहीं मिल रही! ये तो ऐसा ही है जैसे आपने खाना बना लिया और खाने के लिए थाली ही न हो.
भारतीय किसान यूनियन के संभाग अध्यक्ष ने बताया कि अभी तक केवल 25% किसानों की मूंग ही तुल पाई है. ये आँकड़ा चौंकाने वाला है! उनका सीधा आरोप है कि ज़्यादातर तुलाई “फ़र्ज़ी तरीक़े से व्यापारियों की हुई है,” न कि छोटे और मझोले किसानों की. यानी, असली ज़रूरतमंद किसान बेचारा अब भी अपनी मूंग को लेकर मारा-मारा फिर रहा है. संभाग अध्यक्ष ने गुस्से में कहा, “देवरी क्षेत्र के लगभग 70% किसान अभी भी तुलाई से वंचित हैं. अगर ऐसे ही हालात रहे और स्लॉट बुक नहीं हुए, तो किसान अपनी मूंग की फसल कहाँ ले जाएगा? किसको बेचेगा?”
सरकार से सीधी अपील: साइट फिर से चालू करो!
किसानों की सबसे बड़ी माँग ये है कि सरकार को स्लॉट बुक करने वाली वेबसाइट को फिर से चालू करना चाहिए. उनका कहना है कि इससे किसान अपना रजिस्ट्रेशन कराकर वेयरहाउस में मूंग की तुलाई आसानी से करवा सकेंगे. ये तो बिल्कुल साफ-साफ बात है. अगर सरकारी सिस्टम ही बंद रहेगा, तो किसान कहाँ जाएँगे?
दूसरी तरफ़, वेयरहाउस मालिक भी अपनी मजबूरी बता रहे हैं. उनका कहना है, “हमारे वेयरहाउस में जितनी क्षमता है, उतनी मूंग हम खरीद रहे हैं. उससे ज़्यादा खरीद कर आख़िर कहाँ रखेंगे?” ये बात भी अपनी जगह सही है. वेयरहाउसों की भी एक सीमा होती है. लेकिन इस बीच पिस कौन रहा है? सीधा-सीधा किसान!
कलेक्टर ने सुनी किसानों की बात, अब समाधान का इंतज़ार
अच्छी ख़बर ये है कि भारतीय किसान यूनियन ने इस पूरे मामले को लेकर ज़िला कलेक्टर से भी मुलाक़ात की. कलेक्टर ने किसानों की समस्या को ध्यान से सुना और उन्हें आश्वासन दिया है कि इस समस्या का जल्द से जल्द समाधान किया जाएगा. अब देखना ये है कि यह आश्वासन कब हकीकत में बदलता है और किसानों को कब राहत मिलती है.
ज्ञापन सौंपने वालों में भारतीय किसान यूनियन के कई बड़े पदाधिकारी मौजूद थे, जिनमें प्रदेश पदाधिकारी वीरेंद्र सिंह राजपूत, परसोत्तम लोधी, रायसेन ज़िला अध्यक्ष मुकेश शर्मा, ज़िला उपाध्यक्ष संतोष रघुवंशी, भारतीय किसान यूनियन ग्रामीण अध्यक्ष महिपाल गंगोलिया और ग्राम रामपुरा के सरपंच कामता लोधी शामिल थे. इनकी उपस्थिति बताती है कि ये मुद्दा कितना गंभीर है और किसानों में कितना रोष है.
राज राजेश्वरी वेयरहाउस पर मूंग चोरी का गंभीर आरोप!
इन सब समस्याओं के बीच एक और चौंकाने वाली ख़बर सामने आई है. किसान यूनियन के पदाधिकारी नरेंद्र लोधी ने एक गंभीर आरोप लगाया है. उन्होंने बताया कि वह अपनी मूंग की फसल बेचने के लिए राज राजेश्वरी वेयरहाउस गए थे, जहाँ उनकी 6 क्विंटल मूंग कम हो गई! ये तो किसानों के साथ सरासर धोखाधड़ी है. पहले ही किसान कई तरह की मुश्किलों से जूझ रहा है, ऊपर से चोरी और धोखाधड़ी!
नरेंद्र लोधी ने सभी किसानों से अपील की है कि वे सतर्क रहें और चोरों से सावधान रहें. उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि अधिकारियों को इस चोरी की जाँच करनी चाहिए और पता लगाना चाहिए कि आख़िर मूंग किसने चुराई है, ताकि भविष्य में किसानों के साथ ऐसी ठगी न हो. ये तो बिल्कुल सही बात है. अगर ऐसे ही किसानों की मेहनत की कमाई चोरी होती रहेगी, तो उनका भरोसा उठ जाएगा. प्रशासन को इस मामले में तुरंत एक्शन लेना चाहिए और दोषियों को सज़ा दिलानी चाहिए.
किसानों की ये समस्याएँ सिर्फ़ देवरी की नहीं हैं, बल्कि पूरे देश के किसानों की कहानी है. उम्मीद है कि प्रशासन इन समस्याओं को गंभीरता से लेगा और जल्द से जल्द इसका कोई ठोस समाधान निकालेगा, ताकि किसान चैन की साँस ले सकें और उन्हें अपनी फसल बेचने के लिए दर-दर न भटकना पड़े.