जिले में शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर प्रशासन अब और भी ज्यादा सक्रिय हो गया है। कलेक्टर डी. राहुल वेंकट के निर्देश पर शुक्रवार को अनुविभागीय अधिकारी राजस्व (एसडीएम) शशि शेखर मिश्रा और विकासखंड शिक्षा अधिकारी मोहम्मद स्माइल खान ने भरतपुर ब्लॉक के दो स्कूलों का औचक निरीक्षण किया।
अधिकारियों ने सबसे पहले शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय देवगढ़ और फिर शासकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय डोमहरा का दौरा किया। यहाँ पहुँचकर उन्होंने न सिर्फ कक्षाओं का निरीक्षण किया बल्कि शिक्षकों और स्टाफ की एक बैठक भी ली। इस दौरान उन्होंने शिक्षकों से शैक्षणिक गतिविधियों, छात्रों की उपस्थिति और पढ़ाई की गुणवत्ता को लेकर विस्तार से जानकारी ली।
छात्रों की पढ़ाई पर विशेष जोर
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने स्कूलों में पढ़ाई की स्थिति पर विशेष ध्यान दिया। उन्होंने शिक्षकों से कहा कि बच्चों की परीक्षा की तैयारियों में कोई कमी न रह जाए। इसके लिए लेसन प्लान और टाइम टेबल के अनुसार नियमित और योजनाबद्ध तरीके से कक्षाएं संचालित की जाएं।
एसडीएम शशि शेखर मिश्रा ने कहा कि –
“छात्रों का भविष्य शिक्षकों के समर्पण पर निर्भर करता है। यदि हम सभी अपने दायित्व को पूरी ईमानदारी से निभाएं, तो निश्चित रूप से बोर्ड परीक्षाओं में अच्छे परिणाम आएंगे।”
शिक्षकों को मिले जरूरी निर्देश
समीक्षा बैठक में सभी शिक्षकों को साफ तौर पर निर्देश दिए गए कि वे पढ़ाई के स्तर को सुधारने, स्मार्ट क्लास और तकनीकी माध्यमों का इस्तेमाल करने, और छात्रों के साथ व्यक्तिगत संवाद बढ़ाने की दिशा में काम करें। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि सभी छात्र समय पर स्कूल आएं और पढ़ाई से जुड़ी सभी गतिविधियों में हिस्सा लें।
छात्रों की उपस्थिति और सुविधाएं भी देखी गईं
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने छात्र-छात्राओं की उपस्थिति रजिस्टर, शिक्षण सामग्री, पुस्तक वितरण, शौचालय की सफाई व्यवस्था और पीने के पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं का भी जायजा लिया। उन्होंने स्कूल प्रबंधन को निर्देशित किया कि बच्चों को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसका ध्यान रखा जाए।
बेहतर परिणाम के लिए सामूहिक प्रयास की जरूरत
विकासखंड शिक्षा अधिकारी मो. स्माइल खान ने शिक्षकों से कहा कि हमें शिक्षा के स्तर को ऊंचा उठाने के लिए सामूहिक प्रयास करने होंगे। उन्होंने कहा कि शासन और प्रशासन दोनों ही शिक्षा के सुधार के लिए लगातार प्रयासरत हैं, अब ज़िम्मेदारी शिक्षकों की है कि वे मैदान में उतरकर परिणाम दें।
समाज की भागीदारी जरूरी
निरीक्षण के अंत में अधिकारियों ने यह भी कहा कि शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने में सिर्फ शिक्षकों ही नहीं, बल्कि अभिभावकों और समाज की भागीदारी भी बेहद जरूरी है। जब सभी मिलकर काम करेंगे, तभी आने वाले समय में गांवों और कस्बों से भी टॉपर्स निकलेंगे।