रिपोर्ट: जितेन्द्र साहू, धमतरी
एक्सक्लूसिव – दैनिक हिस्ट्री
धमतरी, 18 जुलाई 2025 – जैसे ही नया शैक्षणिक सत्र शुरू हुआ, धमतरी जिले में स्कूलों की तालाबंदी की घटनाएं फिर से सामने आने लगी हैं। इस बार जिले के वनांचल इलाके के दो स्कूल – प्राथमिक एवं माध्यमिक शाला सेमरा और प्राथमिक शाला दुगली में अभिभावकों और ग्रामीणों ने स्कूल के गेट पर ताले जड़ दिए हैं। वे शिक्षकों की नियुक्ति समेत अपनी विभिन्न मांगों को लेकर स्कूल परिसर के सामने डटे हुए हैं और साफ कह दिया है कि जब तक समाधान नहीं होगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
क्यों हो रही है तालाबंदी?
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, सिहावा और नगरी वनांचल क्षेत्र के स्कूलों में लंबे समय से शिक्षकों की कमी की समस्या बनी हुई है।
सेमरा के प्राथमिक और माध्यमिक स्कूल में वर्तमान प्रधानपाठक को हटाने और नए शिक्षक की नियुक्ति की मांग को लेकर पालकों ने मोर्चा खोल दिया है।
वहीं, दुगली के प्राथमिक स्कूल में शिक्षक न होने के चलते बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, जिसे लेकर पालक और ग्रामीणों ने ताला जड़कर अपना आक्रोश जताया है।
क्या बोले पालक और ग्रामीण?
प्रदर्शन कर रहे पालकों का कहना है कि वे बच्चों का भविष्य बर्बाद नहीं होने देंगे।
“जब से स्कूल खुला है, पढ़ाई ढंग से नहीं हो पा रही। शिक्षक हैं ही नहीं, और जो हैं, वो बच्चों को पढ़ाने की बजाय अक्सर गायब रहते हैं। हमने कई बार अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई,” — एक स्थानीय पालक ने बताया।
शिक्षा विभाग पर उठे सवाल
नए सत्र की शुरुआत होते ही जिले में ये तीसरी या चौथी बार है जब पालकों ने स्कूल में तालाबंदी की है। पहले भी कई ग्रामीण इलाकों से इस तरह की खबरें सामने आ चुकी हैं, लेकिन शिक्षा विभाग की ओर से कोई ठोस पहल नहीं की गई है।
तालाबंदी के दौरान स्कूल में पढ़ाई पूरी तरह ठप हो गई है। समाचार लिखे जाने तक कोई भी जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा था, जिससे ग्रामीणों में और ज्यादा नाराजगी देखी जा रही है।
समाधान की बजाय हो रही है अनदेखी?
ग्रामीणों का आरोप है कि शिक्षा विभाग और प्रशासन की लापरवाही की वजह से उनका धैर्य जवाब देने लगा है।
“हम अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन जिन पर जिम्मेदारी है वो कुर्सी से उठने को तैयार नहीं,” – दुगली के एक ग्रामीण ने गुस्से में कहा।
आगे क्या?
स्थानीय लोग चेतावनी दे रहे हैं कि अगर जल्द ही शिक्षक नियुक्त नहीं हुए या विभाग की ओर से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। वे कलेक्टर और शिक्षा मंत्री को ज्ञापन सौंपने की भी तैयारी में हैं।
निष्कर्ष:
धमतरी जिले के ग्रामीण स्कूलों में शिक्षक की भारी कमी और विभागीय अनदेखी से नाराज पालक अब खुलकर विरोध कर रहे हैं। यह मामला अब केवल शिक्षा से जुड़ा मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि बच्चों के भविष्य और सरकारी तंत्र की जिम्मेदारी का भी बड़ा सवाल बन चुका है।