राजस्थान के उदयपुर में साल 2022 में हुई कन्हैयालाल जी की बेरहम हत्या पर बनी फिल्म ‘उदयपुर फाइल्स’ की रिलीज़ पर अदालत ने रोक लगा दी है। रोक से विश्व हिंदू परिषद (विहिप) और बजरंग दल नाराज़ हैं। आज, बस्तर जिले के विहिप और बजरंग दल के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने इस रोक के विरोध में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के नाम एक ज्ञापन सौंपा। उनकी मांग है कि इस फिल्म से प्रतिबंध तुरंत हटाया जाए।
‘यह आतंक के खिलाफ उठी आवाज़ को दबाने जैसा’
बजरंग दल के जिला संयोजक मुन्ना कोरी ने कहा कि फिल्म पर रोक लगाना अभिव्यक्ति की आज़ादी के खिलाफ है। उन्होंने इसे “आतंक के खिलाफ उठी एक मज़बूत आवाज़ को दबाने की कोशिश” बताया। कोरी ने ज़ोर देकर कहा कि यह फिल्म एक सच्ची घटना पर आधारित है, जिसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। उनका मानना है कि जनता को यह सच्चाई देखने और समझने का पूरा अधिकार है। उन्होंने कहा कि जब कोई सच्ची घटना पर फिल्म बनती है, तो उसे लोगों तक पहुंचने देना चाहिए, ताकि समाज उससे कुछ सीख सके।
‘लोकतंत्र की आत्मा के खिलाफ है यह प्रतिबंध’
विहिप के विभाग सेवा प्रमुख, अनिल अग्रवाल, ने इस प्रतिबंध को “लोकतंत्र की भावना के विरुद्ध” बताया। उन्होंने साफ़ किया कि अगर किसी को फिल्म के किसी हिस्से से कोई आपत्ति है, तो उसके लिए सेंसर बोर्ड और कानूनी रास्ते जैसे उचित तरीके मौजूद हैं, न कि सीधे फिल्म पर पूरी तरह से रोक लगा देना।
अग्रवाल ने यह भी मांग की कि फिल्म बनाने वालों को ज़रूरी सुरक्षा और न्याय दिया जाए, ताकि वे बिना किसी डर के सच्चाई को समाज के सामने ला सकें। उनका मानना है कि अगर हम सच्ची कहानियों पर आधारित फिल्मों पर ऐसे प्रतिबंध लगाते रहे, तो भविष्य में फिल्म निर्माता सच को सामने लाने से हिचकिचाएंगे।
‘करोड़ों सनातनियों की आस्था से जुड़ा मामला’
विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल ने मिलकर इस पूरे मामले को करोड़ों सनातनियों की आस्था और राष्ट्रीय चेतना से जुड़ा विषय बताया। उन्होंने अपनी ज्ञापन में मांग की कि राष्ट्रहित, लोकतांत्रिक मूल्यों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा करते हुए ‘उदयपुर फाइल्स’ फिल्म की रिलीज़ को तुरंत मंज़ूरी दी जाए। उनका कहना है कि इस फिल्म के माध्यम से समाज में जागरूकता आएगी और ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने में मदद मिलेगी। यह सिर्फ एक फिल्म का मामला नहीं, बल्कि देश की सुरक्षा और समाज की सच्चाई से जुड़ा मुद्दा है।
ज्ञापन सौंपने वाले प्रमुख लोग
इस महत्वपूर्ण मौके पर ज्ञापन सौंपते समय विहिप विभाग सेवा प्रमुख अनिल अग्रवाल, जिला संयोजक मुन्ना बजरंगी (कोरी), जिला गौ संवर्धन प्रमुख विष्णु ठाकुर, नगर संयोजक भवानी सिंह चौहान, नगर अर्चक पुरोहित संजय मुखर्जी, हेमराज कश्यप, पवन राजा, रोहित झा, चकरी राव, लोचन सोनी, मनीष भाटी, मुकेश पानीग्राही, जशवंत जोशी, काशी चालकी और योगेश ठाकुर सहित कई कार्यकर्ता मौजूद रहे। सभी ने एक सुर में फिल्म से रोक हटाने की मांग की।
आगे क्या?
अब देखना यह होगा कि इस ज्ञापन और संगठनों की मांग पर सरकार और न्यायपालिका क्या कदम उठाती है। विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल ने साफ कर दिया है कि वे इस मुद्दे पर अपनी आवाज़ उठाते रहेंगे जब तक कि ‘उदयपुर फाइल्स’ रिलीज़ नहीं हो जाती। यह मामला अब सिर्फ एक फिल्म की रिलीज़ का नहीं, बल्कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सच्ची घटनाओं को समाज तक पहुंचाने के अधिकार का बन गया है।