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तेन्दूखेडा और डोभी में स्कूली बच्चों की जान जोखिम में, एलपीजी से चलने वाली स्कूल वैन बिना सुरक्षा दौड़ रही सड़कों पर

तेन्दूखेडा और डोभी में स्कूली बच्चों की जान खतरे में, एलपीजी वैन बना रही हादसों का रास्ता

On: July 16, 2025 6:37 AM
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धर्मेंद्र साहू

तेन्दूखेडा/डोभी।
तेन्दूखेडा और डोभी इलाके में बच्चों की स्कूल वैन मौत बनकर सड़कों पर दौड़ रही हैं। यहां करीब 100 से ज्यादा एलपीजी गैस से चलने वाली मारुति वैन स्कूलों के बच्चों को रोजाना ला-ले जा रही हैं, लेकिन न तो इनमें सुरक्षा के कोई इंतजाम हैं, न हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट और न ही नियमों का पालन किया जा रहा है। ये वैन क्षमता से कहीं अधिक यानी 20-25 बच्चों कोぎठा भरकर दौड़ाई जाती हैं, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।

ना पुलिस जागी, ना आरटीओ

हैरानी की बात ये है कि इतनी गंभीर लापरवाही के बावजूद अभी तक न तो ट्रैफिक पुलिस ने कोई कार्रवाई की और न ही आरटीओ विभाग ने कोई कदम उठाया है। स्कूल वैनों की ये लापरवाही सालों से जारी है, लेकिन जिम्मेदार विभागों ने आंखें मूंद रखी हैं।

बिना फिटनेस, बिना जांच दौड़ रही स्कूली वैन

डोभी और तेन्दूखेडा के बीच दौड़ रही कई स्कूल वैन न तो फिटनेस टेस्ट से गुज़री हैं और न ही इनका कोई वैध परमिट या बीमा है। इसके बावजूद ये स्कूली वाहन लगातार छोटे-छोटे बच्चों को ढो रहे हैं। कई मामलों में तो ये वैन बिना किसी तकनीकी जांच के सालों से चल रही हैं। इनमें ना फायर सेफ्टी किट है, ना आपातकालीन निकासी की व्यवस्था।

गाड़ी में ठूंसे जाते हैं बच्चे

स्थानीय लोगों और बच्चों के अभिभावकों का कहना है कि इन मारुति वैनों में बच्चों को ठूंस-ठूंस कर भरा जाता है। कई बार बच्चों को एक-दूसरे की गोद में बैठाकर भी स्कूल भेजा जाता है। ड्राइवरों को स्कूल के दो-तीन राउंड लगाने होते हैं, जिसके चलते वे समय बचाने के लिए तेज रफ्तार में वाहन चलाते हैं। यह रफ्तार किसी दिन किसी मासूम की जान ले सकती है।

स्कूल प्रबंधन भी जिम्मेदारी से भाग रहा

स्कूलों का प्रबंधन भी इन गैरकानूनी और असुरक्षित वाहनों को लेकर चुप्पी साधे हुए है। न तो वे ड्राइवरों की वैधता की जांच करते हैं और न ही गाड़ियों की स्थिति का कोई रिकॉर्ड रखते हैं। इन स्कूल वैनों को देखकर साफ कहा जा सकता है कि बच्चों की सुरक्षा कहीं प्राथमिकता में ही नहीं है।

स्थानीय लोगों की मांग – हो सख्त कार्रवाई

स्थानीय लोगों ने मांग की है कि प्रशासन तुरंत संज्ञान ले और ऐसे वाहनों पर सख्त कार्रवाई करे। साथ ही एलपीजी से चलने वाली गाड़ियों की विशेष जांच की जाए। यदि ये गाड़ियां बच्चों के लिए सुरक्षित नहीं हैं तो इन्हें चलने से रोका जाए। अभिभावकों का भी कहना है कि बच्चों की जान के साथ खिलवाड़ नहीं होना चाहिए।

निष्कर्ष: जिम्मेदार कब जागेंगे?

तेन्दूखेडा और डोभी में जो हालात हैं, वो सिर्फ एक इलाके की तस्वीर नहीं बल्कि प्रदेश के कई हिस्सों की सच्चाई है। बच्चों की सुरक्षा के नाम पर बड़ी लापरवाही हो रही है, और अगर समय रहते प्रशासन नहीं जागा तो किसी दिन कोई बड़ा हादसा हो सकता है, जिसकी जिम्मेदारी किसी एक की नहीं बल्कि पूरे सिस्टम की होगी।

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