कोंडागांव जिले के आश्रम छात्रावासों की हालत इन दिनों (Kondagaon Hostel Issue) किसी से छुपी नहीं है। सरकार की ओर से साल-दर-साल करोड़ों की राशि स्वीकृत की जाती है, टेंडर प्रक्रिया भी पूरी होती है, लेकिन इन सब के बावजूद बच्चों तक उनकी बुनियादी जरूरतें ही नहीं पहुंच पा रहीं। इसका सबसे ताज़ा और चौंकाने वाला उदाहरण अनंतपुर प्री-मैट्रिक कन्या छात्रावास में देखने को मिला है, जहां बच्चे फटे, चीथड़ों में बदल चुके गद्दों पर सोने को मजबूर हैं।
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DMFT का पैसा खर्च, लेकिन गद्दे नहीं पहुंचे!
वित्तीय वर्ष 2022-23 में कोंडागांव जिले में आश्रम छात्रावासों के लिए DMFT के माध्यम से 99.98 लाख रुपये मंजूर किए गए थे। इस रकम से छात्रावासों के लिए गद्दे, थाली, गिलास, सिंटेक्स टैंक, प्रेशर कुकर, LED टीवी, टाटा स्काई और CCTV कैमरों की खरीदी होनी थी। (Kondagaon Hostel Issue)
कागजों में तो ये सभी सामान खरीदे गए बताए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति बिल्कुल उलट दिखाई देती है। कई छात्रावासों में न गद्दे पहुंचे, न थालियां और न ही जरूरी उपयोग की बाकी सामग्री। (Kondagaon Hostel Issue)
सबसे ज्यादा खराब स्थिति अनंतपुर छात्रावास की है, जहां बच्चे अब भी उन्हीं पुरानों, उधड़े और चीथड़े हो चुके गद्दों पर रात गुजारने को मजबूर हैं। ठंड बढ़ रही है, लेकिन हालात जस के तस हैं। (Kondagaon Hostel Issue)
जर्जर भवन में रहते मासूम छात्र
अनंतपुर छात्रावास की स्थिति सिर्फ गद्दों तक सीमित नहीं है। पूरा भवन जर्जर अवस्था में है।
- जगह-जगह दीवारों का प्लास्टर उखड़ा हुआ
- छत में दरारें
- टूटी हुई टाइल्स
- कई जगह फर्श भी उखड़ चुका
ऐसे भवन में रह रहे छोटे बच्चे हर दिन जोखिम झेल रहे हैं। बड़ी बात यह है कि यह छात्रावास अभी बालक छात्रावास के रूप में संचालित है और यहां दर्जनों बच्चे रह रहे हैं। (Kondagaon Hostel Issue)
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आदिवासी बच्चों का हक कौन छीन रहा है?
यह सवाल बड़ा है कि जब DMFT फंड से खरीद प्रक्रिया पूरी की गई थी, तो आखिर सामग्री पहुंची क्यों नहीं?
किसने बच्चों का हक रोका?
क्या खरीदी सिर्फ कागजों में पूरी की गई?
या फिर बीच में ही कहीं अनियमितता हुई?
इन सवालों के जवाब अब तक स्पष्ट नहीं हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि इसका सीधा नुकसान आदिवासी बच्चों को हो रहा है, जिन्हें इस उम्र में अच्छा माहौल और बेहतर सुविधाएं मिलनी चाहिए। (Kondagaon Hostel Issue)
सहायक आयुक्त ने कहा— जांच होगी
मामले में आदिवासी विकास विभाग कोंडागांव के सहायक आयुक्त कृपेंद्र तिवारी ने कहा कि छात्रावासों की नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है। (Kondagaon Hostel Issue)
उन्होंने बताया कि जहां भी गद्दे खराब मिले हैं, उन्हें बदला जा रहा है।
DMFT से की गई खरीदी पर उन्होंने साफ कहा कि यह प्रक्रिया उनके पदस्थापना से पहले की गई थी।
उन्होंने कहा—
“हमें देखना पड़ेगा कि उस मद से क्या-क्या खरीदा गया था। दस्तावेजों की जांच के बाद ही कुछ कहा जा सकेगा।”
बच्चों की सुविधा पर सवाल, जिम्मेदारी तय कब होगी?
इस पूरे मामले ने छात्रावास प्रबंधन, विभागीय कार्यप्रणाली और खरीद प्रक्रिया पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
जब करोड़ों रुपये स्वीकृत और खर्च दिखाए जाते हैं, तो बच्चों तक उसका लाभ क्यों नहीं पहुंचता? (Kondagaon Hostel Issue)
अब जरूरत है—
- छात्रावासों का फिजिकल वेरिफिकेशन
- खरीदी की जांच
- जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई
- और सबसे जरूरी, बच्चों को तुरंत सुविधाओं की उपलब्धता
क्योंकि बिना बुनियादी सुविधाओं के इन मासूम बच्चों की पढ़ाई और स्वास्थ्य दोनों प्रभावित हो रहे हैं। (Kondagaon Hostel Issue)